बुधवार, 11 नवंबर 2009

मरने के बाद आत्मा की कोनसी शांति के लिए प्रार्थना करते हैं!!!



पीछे हमने जाना आत्मा और शरीर में आत्मा का निवास स्थान| आइये अब चर्चा करते है की आत्मा के गुण धर्म और स्वरुप क्या है|
आत्मा शांति स्वरुप है|
प्रेम स्वरुप है|
ज्ञान स्वरुप है|
दया स्वरुप है|
जो भी हमें अच्छे गुण लगते हैं वही आत्मा के गुण है, और यही कारण है की वो हमें अच्छे लगते है|

एक निर्दयी आदमी जो की हमेशां दूसरो कष्ट देने वाला होता है, अगर हम उसे बुरा कहें तो क्या वो खुश होगा?? नहीं? तो क्यों? क्यूंकि वो भी उन दुर्गुणों को नहीं चाहता, और वो आत्मा ये कतई सहन नहीं कर सकती की उसको दुसरे के गुणों से पुकारा जाए|
अगर किसी दुष्ट मनुष्य को आप कहोगे की आप कितने अच्छे आदमी है! कितने शांत हैं ! कितने उदार दिल हैं! तो वो खुश होगा ! क्यों?
क्योंकि ये आत्मा के गुण हैं आत्मा अपने गुण को सुनना चाहती है! जो की लुप्त प्राय: हैं |
आत्मा का सबसे बड़ा गुण है शांत स्वरुप| यही कारण है की हम शांति शांति चिल्लाते रहते है |

कोनसी शांति चाहिए आखिर एकांत में जाकर बैठने से क्या शांति नहीं होती ? और अगर विश्व व्यापी शांति हो जाये तो आत्मा की शांति होगी ?
नहीं ये वो शांति नहीं जिसकी आत्मा को तलाश है|

आत्मा को चाहिए वो शांति जिससे मन में हो रही भयंकर उथल पुथल शांत हो और परमात्म प्यार का संचार हो| अगर विश्व की शांति की बात होती तो मरने के बाद दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ३ मिनट का मौन धारण करके प्रार्थना नहीं करते ! यही वो शांति है जो आत्मा का गुण है|

हम कहते हैं "ॐ शांति" अर्थात मैं आत्मा शांत स्वरुप हूँ| पर अब शांति लुप्त प्राय: है | कहाँ से आये शांति कोन दे शांति! सब अशांत हैं| क्रमश: !!!!

4 टिप्‍पणियां:

  1. ॐ शांति ......
    ACHHA PRAYAAS HAI SHANTI KI KHOJ KA, IS ASHAANT YUG MEIN .... AAGE KI PRATIKSHA RAHEGI ..

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  2. अरे भाई म्हारी तो शांति करवा दिए, मै तो काल ही बुकिंग करवा कै आयो हुं-फ़ेर मरयां पाछे जगह मिले ना मिले-घणो टैम लागण के कारण लोग आधो ही छोड़ के चले जा सै, तो सोच्यो पहले ही बुकिंग करा ले।

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  3. सही बात है और इस लुप्तप्राय शान्ति का ही नतीजा है कि पितृ पक्ष में पितृ देव भी रूचि नहीं ले रहे, उस दरमियान न कौवा दीखता है न गाय दिखती है और न कुत्ता !

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